दिलीप कुमार और मधुबाला की शादी किस वजह से नही हुई?

Story by Qasir Khan: मुहब्बत का फरमान है कि मैं हूं तो सही…… पर तुम रहोगे साथ ये मुमकिन तो नही…

भारतीय सिनेमा में जब जब खूबसूरती की चर्चा होगी यक़ीनन फहरिस्त में सबसे पहला नाम मधुबाला का होगा।

“मधुबाला” यह नाम एक तस्वीर ज़हन में लेकर आता जो खूबसूरती की मिसाल है। जैसे खुदा का फुर्सत में बैठ कर तराशा एक नगीना हो। “महल ”  हो या फिर “मिस्टर एंड मिसेज 55” की बाला हो या हावरा ब्रिज पर अपसरा की तरह नाचती हिरोइन हो या भारतीय फिल्म इतिहास की सबसे बड़ी फिल्म मुग़ले आज़म की वो कनीज़ अनारकली जो यक़ीनन एक शहज़ादी का रुतबा रखती हो।

नज़ाकत, खूबसूरती, ताज़गी और नूरानी चेहरे वाली वो शख्सीयत जिसे दुनिया में हम मधुबाला के नाम से जानते और पहचानते हैं।

खूबसूरती की मिसाल मधुबाला को गुज़रे पांच दशक से ज़्यादा हो गए हैं लेकिन आज भी उनके चाहने वाले उन्हें पूरी शिद्दत से अपने दिलों में बसाए बैठे हैं।

यूं तो मधुबाला के चाहने वाले उस दौर में भी कम नही थे ना केवल उन्हें पर्दे पर देखने वाले बल्कि उनके साथ काम करने वाले भी उनकी अदाओं पर क़ायल थे। चाहें वो राजकपूर हो या शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे हो या फिर शम्मी कपूर। पर इस कनीज़ का दिल तो शहज़ादे सलीम के पास था।

एक समय था जब दिलीप कुमार और मधुबाला की जोड़ी फिल्मी इतिहास की सबसे रोमांटिक जोड़ी मानी जाती थी और हक़ीकत में भी दोनो एक दूसरे से ही प्यार करते थे और वही प्यार उनके चाहने वालो को पर्दे पर देखने को मिलता था। साल था 1955 जब पहली बार दिलीप और मधुबाला एक फिल्म के प्रीमियर पर साथ देखने को मिले. यह पहला मौका था जब दोनो खुले आम दुनिया के सामने साथ नज़र आए थे। उस समय के लोगो का कहना है कि यह जोड़ी पूरे कार्यक्रम में एक दूसरे की बांहे थामे ही नज़र आई और मधुबाला इससे पहली कभी इतनी खुश नज़र नही आई थी।

हालांकि लोगो के बीच ये धारणा हैं कि मधुबाला के पिता कभी यह नही चाहते थे की मधुबाला और दिलीप कुमार की शादी हो लेकिन दिलीप कुमार ने अपनी किताब में इसके खिलाफ लिखा है।

किताब में दिलीप कुमार ने लिखा है कि  ” जैसा कि कहा जाता है, उसके उलट मधु और मेरी शादी के ख़िलाफ़ उनके पिता नहीं थे. उनकी अपनी प्रॉडक्शन कंपनी थी और वे इस बात से बेहद ख़ुश थे कि एक ही घर में दो बड़े स्टार मौजूद होंगे. वो तो चाहते थे कि दिलीप कुमार और मधुबाला एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले अपने करियर के अंत तक उनकी फिल्मों में डूएट गाते नजर आएं।”

फिर दिलीप कुमार ने बताई वो वजह की आखिर यह दोनो कभी एक क्यों ना हो पाए।

” जब मुझे मधु से उनके पिता की योजनाओं के बारे में पता चला तो मेरी उनसे कई बार बातचीत हुई जिसमें मैने उन दोनो से कहा कि मेरे काम करने का तरीका अलग है, में अपने हिसाब से प्रोजेक्ट चुनता हूं और मेरा प्रोडक्शन हाउस उसमें हो तो में काम में ढिलाई नहीं कर सकता।”

और यह बात मधुबाला के पिता अयातुल्ला खान को पसंद नही आई और उन्होने दिलीप कुमार के प्रति अपना नज़रिया बदल कर उनहें ज़िद्दी और अड़ियल मानने लगे। हालांकि दिलीप के मुताबिक मधुबाला हमेशा से अपने पिता की तरफ ही खड़ी रहीं और वो कहती रहीं कि शादी होने के बाद सबकुछ ठीक हो जाएगा। दिलीप कुमार हमेशा शादी के लिए तैय्यार थे एक बार 1956 में फिल्म ढाके की मलमल की शूटिंग चल रही तब दिलीप कुमार ने मधुबाला से कहा भी चलो मेरे घर क़ाजी इंतज़ार कर रहे हैं आज हम शादी कर लेते हैं। लेकिन इन बातों से मधुबाला रोने लगी तो दिलीप कुमार ने कहा कि आज अगर तुम नहीं चली तो मैं तुम्हारे पास लौटकर नहीं आऊंगा…..कभी नही आऊंगा…..

 

और यही हुआ…उसके बाद दिलीप कुमार, मधुबाला के पास कभी नही लौटे। साल 1957 में एक ऐसा विवाद हुआ जिसने इस सदा बहार जोड़ी की मोहब्बत की राहें हमेशा के लिए जुदा कर किया। दरअसल 1957 में प्रदर्शित फिल्म नया दौर में दिलीप कुमार और मधुबाला  को साइन किया गया था पर इस फिल्म की शूटिंग पूना और भोपाल में होनी थी लेकिन मधुबाला के पिता ने उन्हें भोपाल भेजने से मना कर दिया जिसके बाद फिल्म के निर्देशक बी आर चोपड़ा मामले को कोर्ट तक ले गए और इस फिल्म में मधुबाला की जगह  वैजयंती माला को ले लिया गया। मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही थी और दिलीप कुमार ने वहां पर कहा था कि वो मधुबाला से बेशुमार बोहब्बत करते हैं और उनके मरने तक मोहब्बत करते रहेंगे लेकिन बयान बी आर चोपड़ा के पक्ष में दिया था। अपनी किताब में इसका जिक्र करते हुए दिलीप कुमार ने कहा है कि उन्होंने अपनी ओर से सुलह की बहुत कोशिश की थी लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ था और पूरे मामले में बीआर चोपड़ा का पक्ष सही था और इसके बाद मधुबाला को भी यकीन हो गया कि अब शायद दिलीप कुमार उनके पास वापस कभी नही लौटेंगे।

और इस प्रेम कहानी के दोनो पात्रो ने हमेशा के लिए अलग रास्ते इख्तियार कर लिए। और फिल्म मुग़ले आज़म की तरह असल ज़िन्दगी में भी शहज़ादे सलीम और कनीज़ अनारकली कभी मिल नही पाए…

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