1965 की लड़ाई में पाक के दांत खट्टे करने वाले वीर शहीद अब्दुल हमीद की वीरता की कहानी।

हर किसी के मन में होता है मैं बड़ा होकर देश के लिए कुछ करू. वीर शहीद अब्दुल हमीद के मन में भी देश के लिए कुछ कर गुजरने का मन था. देश की सेवा करने के लिए अब्दुल हमीद सेना में भर्ती हुए. हमीद के अंदर जोश और देश भक्ती कूट-कूट कर भरी हुई थी. उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के गांव धामपुर में साधारण परिवार में जन्में वीर अब्दुल हमीद के पिता भी सेना में ही थे.
परमवीर चक्र अब्दुल हमीद को देश सेवा करने की प्रेरणा घर से ही मिली थी. हमीद का पिता लांस नायक उस्मान फारूखी भी सेना में ग्रेनेडियर थे. पिता की प्रेरणा से उत्साहित होकर सेना में भर्ती हुए और कूद पड़े 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान के खिलाफ. वीर अब्दुल हमीद पाकिस्तान के टैंकों पर ऐसा निशाना साधा की पाकिस्तान के टैंक अब्दुल हमीद के आगे ध्वस्त हो गए.
1965 की लड़ाई की बात आते ही अब्दुल हमीद का नाम बड़े गर्व से लिया जाता है. 1965 में पाकिस्तान के गलत मंसूबों को वीर हमीद ने ध्वस्त कर दिया था. पाकिस्तान की हमीद ने एक न चलने दी. इस देश के जाबांज ने पाकिस्तान के सैनिकों की कमर तोड़ दी थी.
1965 में जब पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया तो, उस समय वीर हमीद पंजाब के तरन-तारन में तैनात थे.पाकिस्तान ने आठ सिंतबर की रात खेमकरण में भारत पर हमला किया तो, वीर शहीद हमीद ने भारतीय सेना के साथ अपना मोर्चा संभाला. हमीद के पास हौंसले के अलावा और देश की रक्षा की प्रेरणा के अलावा कोई बड़ा हथियार नहीं था.
वीर शहीद अब्दुल हमीद बगैर जान की परवाह किए पाकिस्तान के टैंको के सामने खड़े हो गए, औऱ अपनी गन माउनटेड जीप में बैठकर पाकिस्तान के सात टैंकों को ध्वस्त कर दिया. पाकिस्तान के सैनिक भागने लगे और हमीद पाक सैनिकों का पीछा करने लगे. इसी बीच वीर शहीद अब्दुल हमीद की जीप पर पाकिस्तान की तरफ से बम फेंका गया. जिससे हमीद पूरी तरह जख्मी हो गए और 10 सितंबर को शहीद हो गए.
वीर अब्दुल हमीद के देहांत के बाद उन्हें महावीर चक्र और बाद में सेना के सबसे सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से अलंकृत किया गया. 1965 के युद्ध के बाद निर्देशक चेतन आन्नद ने 1988 में एक धारावाहिक सिरीयल भी बनाया जिसमें रोल नसरूद्दीन शाह ने निभाया.

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