अनिल कपूर ने बताया महिला प्रधान फिल्मों में क्यो नहीं काम करते बड़े ऐकटर

बी टॉउन के सबसे फिट अभिनेता अनिल कपूर ने कई बार बताया हैं कि महिला प्रधान फिल्मों में बड़े एक्टर को लेना कितना कठिन होता हैं. उनके प्रॉडक्शन में बनी फिल्म ‘खूबसूरत’ के दौरान उन्हें फिल्म के लिए हीरो की तलाश करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी थी। फिल्म की कहानी पढ़ने के बाद हर बड़ा ऐक्टर ‘खूबसूरत’ की कहानी को महिला प्रधान फिल्म कह कर काम करने से इनकार कर देता है।

‘जुदाई’, ‘लाड़ला’ और ‘बेटा’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम करने वाले अनिल कपूर कहते हैं उन्हें तो सबसे ज्यादा नाम महिला प्रधान फिल्मों में काम करने से ही कमाया है। अनिल कपूर की मानें तो जब उन्होंने फिल्म ‘जुदाई’ साइन की तो उनके करीबी बेहद हैरान थे, तमाम लोगों ने उन्हें इस तरह की महिला प्रधान फिल्मों से दूर रहने की सलाह भी दी थी, लेकिन फिल्म की कहानी अनिल कपूर को इतनी ज्यादा पसंद आई थी कि उन्होंने फिल्म में काम करने का मन पहले से ही बना लिया था।

अनिल का कहना है कि महिलाओं पर केंद्रित फिल्म में किसी भी बड़े अभिनेता को लाना हमेशा बेहद मुश्किल होता है। करियर के शुरुआती दौर में फिल्म उद्योग के लोगों ने उन्हें ऐसी फिल्म, जिसमें हिरोइन का रोल उनसे ज्यादा मजबूत और बड़ा हो, पुरुष किरदार से ज्यादा बेहतर या उनके बराबर हो, न करने की सलाह दी थी।

अनिल कपूर कहते हैं, ‘जब मैंने ‘जुदाई’ जैसी फिल्म की तो फिल्म उद्योग के कई लोगों को आश्चर्य हुआ कि मैं ऐसी फिल्में क्यों कर रहा हूं? मैं हमेशा वैसी फिल्में करता रहूंगा, जिसमें या तो मेरे लिए अच्छा किरदार होगा या फिर कहानी अच्छी होगी।’

अनिल कपूर ने बताया, ‘मैं घर में पत्नी सुनीता के साथ घर के कई कामों में लोड शेयर करता हूं। ऐसा कोई इंसान नही है जिसने कपड़े ना धोए हो,मैंने भी बहुत बार अपने कपड़ों को खुद ही धोया है और अब तो कपड़े धोने की मशीने भी हैं। पहले तो मशीनें भी नही होती थी .अनिल कपूर बताते है कि ऐसा नही है सिर्फ़ एक दो बार मैंने काफ़ी बार कपड़े धोए है।

अनिल कपूर इस समय ‘पागलपंती’, करण जौहर की फिल्म ‘तख्त’, ‘मलंग’ और ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले शूटर अभिनव बिंद्रा पर बन रही बायॉपिक में काम कर रहे हैं।

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