जानिए एक ऐसे योद्धा की कहानी जिसने पाक से बांग्लादेश को अलग करवाने में अहम भूमिका निभाई थी।

फील्ड मार्शल सैम मानेक शॉ का पूरा नाम सैम होर्मूसजी फ्रेमजी जमशेद जी मानेकशॉ था. सैम ने अपनी जिंदगी के चार दशक फौज में गुजारें और उसने पांच युद्धों में भाग लिया. सौम ने पहली बार ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भरती होकर अपने जीवन की शुरूआत की. सैम ने दूसरे विश्व युद्ध में भी भाग लिया.
दरअसल सैम मानेकशॉ एक ऐसे अफसर थे जो अपने फौजियों को बेहद प्यार किया करते थे और उनकी हर खुशी और दुख में शरीक होते थे. फिर चाहे वह मोर्चे पर हों या कहीं और किसी से मिलने में उन्हें कोई परहेज नहीं था.
1971 के युद्ध में सैम की अहम भूमिका रही हैं. पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के सामने किसी की ना कहने की हिम्मत नहीं होती थी.लेकिन जब 1971 में तत्कातलीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सैन्या कार्रवाई करने का मन बनाया तो तत्का ल ऐसा करने से सैम ने साफ इंकार कर दिया था. पूर्वी पाकिस्तान को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री काफी चिंतित थीं. उन्होंने अप्रैल 27 को एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें सैम भी आमंत्रित थे.
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सैम को कहा पूर्वी पाकिस्तान पर जंग करने को कहा,लेकिन सैम ने साफ इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि जंग के लिए अभी माकूल समय नहीं है. इंदिरा को ये बात न चाहते हुए माननी पड़ी. कुछ माह बाद जब फौजियों को एकत्रित करने और प्रशिक्षण देने के बाद सैम इंदिरा गांधी से मिले तो उनके पास जंग का पूरा खाका तैयार था. इस पर इंदिरा गांधी और उनके सहयोगी मंत्रियों ने सैम से जानना चाहा कि जंग कितने दिन में खत्म हो जाएगी.
सैम ने बताया डेढ से दो माह लगेंगे. लेकिन जब जंग महज चौदह दिनों में खत्म हो गई तो उन्हीं मंत्रियों ने उनसे दोबारा यह सवाल किया कि उन्होंने पहले चौदह दिन क्यों नहीं बताए थे. तब सैम ने कहा कि यदि वह चौदह दिन बता देते और पंद्रह दिन हो जाते तो वहीं उनकी टांग खींचते.

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