2014 और 2019 के चुनाव में क्या रहा अलग

लोकतंत्र का पर्व यानी लोकसभा चुनाव 2019 अब समाप्त हो चुका हैं. 11 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग से इसकी शुरुआत हुई और 19 मई को सातवें और आखिरी चरण के साथ यह संपन्न हुआ. अब सबकी निगाहें 23 मई को आने वाले चुनावी नतीजों पर हैं. उस दिन पता चलेगा कि देश एक बार फिर नरेंद्र मोदी को चुनती है या फिर कोई नया चेहरा प्रधानमंत्री की गद्धी संभालेगा।

ओवरऑल वोटरों में 2 प्रतिशत की कमी

इस बार पिछली बार के मुकाबले 3 करोड़ नए वोटरों ने अपने मताधिकार का उपयोग किया. हालांकि अगर ओवरऑल वोटरों की बात की जाए तो 2014 के मुकाबले इस चुनाव में 2 प्रतिशत की कमी रही.

वोंटिग में इस बार महिलाएं रहीं आगे

पिछले बार के मुकाबले महिलओ ने इस बार बढ़-चढ़कर अपने मत का किया उपयोग. वोटिंग में महिलाएं पुरुषों से सिर्फ 0.4 प्रतिशत कम रहीं। अगर पिछली बार की बात करें तो 2014 में महिलाओं का वोटिंग पर्सेंट पुरुषों के मुकाबले 1.4 प्रतिशत कम था। जाहिर है कि महिला और पुरुष वोटर टर्नआउट में गैप तकरीबन भर चुका है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, मणिपुर, मेघालय, गोवा, पुदुचेरी, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में तो महिला वोटरों की तादादा पुरुषों से ज्यादा है।

इस बार दिग्गज नेता नहीं दिखे प्रचार में

इस बार चुनाव प्रचार में 2014 कि तरह स्टार कैंपेनर नजर नही आए. इनमें से तो कुछ स्वाभाविक रुप से नही रहें हैं. जयललिता और करुणानिधि का क्रमशः 2016 और 2018 में निधन हो गया।

लालू प्रसाद यादव जेल में सजा काट रहे हैं।

तो कुछ को रिटायरमेंट के लिए मजबूर होना पड़ा (लाल आडवानी और मुरली मनोहर जोशी ओवर एज होने की वजह से)। वहीं कुछ ने मर्जी से खुद को इससे दूर रखा (सुषमा स्वराज, खराब स्वास्थ्य की वजह से)

तो कुछ ने उत्तराधिकारी को जिम्मेदारी सौंप दी (सोनिया गांधी, वह पांचवीं बार राय बरेली से उम्मीदवार तो हैं लेकिन चुनाव प्रचार में बहुत ज्यादा हिस्सा नहीं लिया, बेटे राहुल और बेटी प्रियंका वाड्रा को यह जिम्मेदारी सौंपी।

2014 की तरह चुनाव प्रचार नही किया मोदी और राहुल ने

इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव की तरह प्रचार नही किया. पिछली बार मोदी ने सितंबर 2013 से लेकर मई 2014 तक 8 महीनों में नरेंद्र मोदी ने कुल 437 रैलियों को संबोधित किया।

इस बार उन्होंने कुल 144 रैलियां और रोड शो किए। रैलियों के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मोदी के ठीक पीछे रहे। उन्होंने इस बार 125 रैलियों को संबोधित किया जबकि 2014 में सिर्फ 46 रैलियां की थीं।

 

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